बंगाल में चुनाव परिणाम आने के बाद में हिंसा जारी, 8 जून के बाद से अब तक कम से कम 44 लोगों की हुई मौत

12 जुलाई 2023  पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के ऐलान होते ही राजनीतिक हिंसा शुरू हो गई थी। यह दौर मतदान के दौरान भी जारी रहा और चुनाव परिणाम आने के बाद भी जारी है। बता दें कि अब भी मतगणना पूरी नहीं हो पाई है।

बुधवार सुबह दक्षिण 24 परगना में हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई और एक आईपीएस अधिकारी घायल हो गए। 8 जून के बाद से अब तक कम से कम 44 लोगों की मौत हो गई है। चुनाव के दिन ही 18 लोग मारे गए थे।

पंचायत चुनाव में टीएमसी ने क्लीन स्वीप कर दिया है। सत्ताधारी दल ने भाजपा का काफी पीछे छोड़ दिया। पिछले चुनाव में भाजपा ने जहां जीत दर्ज की थी इस बार टीएमसी ने वहां भी परचम लहरा दिया। अब तक की जानकारी के मुताबिक टीएमसी 33 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायत की सीटें जीत चुकी है। वहीं भाजपा के खाते में 9 हजार सीटें आई हैं। कांग्रेस को ढाई हजार सीटें मिली हैं। 2018 में टीएमसी ने 48636 में से 38188 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

वहीं पंचायत समिति की 9730 सीटों में सी टीएमसी को 2612 सीटें हासिल हो गई हैं और भाजपा को महज 275 पर जीत मिली है। जिला परिषद की सीटों में भी टीएमसी का ही बोलबाला है। चुनाव के दिन भी बड़े स्तर पर हिंसा और बूथ कैप्चरिंग हुई थी। इसके बाद 10 जुलाई को 697 बूथों पर दोबारा वोटिंग करानी पड़ी।

दक्षिण 24 परगना के भांगोर में टीएमसी और आईएसएफ के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। इसके बाद क्रूड बम चले, गोलियां चलीं। पुलिस को भी रबर बुलेट से फायर करना पड़ा और आंसू गैस छोड़नी पड़ी। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा एएसपी रैंक के पुलिस अधिकारी घायल हो गए हैं। उन्हें भी गोली लग गई थी। बता दें कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि परिणाम के कम से कम 10 दिन बाद तक राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।