अग्निपथ की आड़ में दिल्ली में भी आग लगाने की साजिश? पुलिस ने अफवाह पर किया आगाह – Nikhil Chetna

अग्निपथ की आड़ में दिल्ली में भी आग लगाने की साजिश? पुलिस ने अफवाह पर किया आगाह

केंद्र की विवादित अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) की आड़ में दिल्ली में फिर दंगा कराने की साजिश की आशंका जताई जा रही है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी इलाके में शुक्रवार को वजीराबाद रोड पर कुछ लोगों ने अग्निपथ के विरोध में बसों को निशाना बनाने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर लिया।

दिल्ली पुलिस ने अफवाह फैलाने वाले लोगों को आगाह करते हुए बताया कि उपद्रवियों के खिलाफ दंगा करने के लिए खजूरी खास थाने में आईपीसी की धारा 147,148,149,427 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है और आगे की जांच जारी है।

दिल्ली पुलिस ने आज ट्वीट कर कहा, ”भजनपुरा और खजूरी के बारे में कुछ असामाजिक तत्व शांतिभंग करने के इरादे से अफवाह फैला रहे हैं। हमारी आप से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान न दें। दिल्ली पुलिस अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करती है।”

संबंधित खबरें

दिल्ली में कुछ मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद

जानकारी के अनुसार, अग्निपथ योजना के खिलाफ शुक्रवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली के कुछ मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए गए थे। दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए यात्रियों को सुरक्षा कारणों से स्टेशनों के द्वार बंद होने के बारे में जानकारी दी। आइसा के सदस्यों ने अग्निपथ योजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस के रवैये के खिलाफ भी प्रदर्शन किया।

डीएमआरसी ने ट्वीट कर जानकारी दी कि सुरक्षा कारणों के चलते शुरुआत में आईटीओ मेट्रो स्टेशन और ढांसा बस स्टैंड मेट्रो स्टेशन के कुछ दरवाजे बंद किए गए। बाद में  ढांसा बस स्टैंड के सभी द्वार कुछ देर के लिए बंद कर दिए गए। इससे पहले, डीएमआरसी ने दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर ट्वीट किया था कि आईटीओ मेट्रो स्टेशन के सभी द्वार बंद हैं। डीएमआरसी ने कहा कि दिल्ली गेट और जामा मस्जिद सहित कुछ अन्य मेट्रो स्टेशन के प्रवेश एवं निकास द्वार भी कुछ समय के लिए बंद किए गए हैं।

सरकार ने मंगलवार को अग्निपथ योजना की घोषणा की थी। सरकार ने कहा था कि साढ़े 17 से 21 वर्ष के युवाओं को चार साल के लिए थल सेना, वायु सेना और नौसेना में भर्ती किया जाएगा और चार साल के बाद उनमें से 25 प्रतिशत को नियमित सेवाएं देने का अवसर दिया जाएगा।

गुरुवार को सरकार ने योजना के लिए ऊपरी आयु सीमा को 2022 के लिए 21 से बढ़ाकर 23 वर्ष करने की घोषणा की, लेकिन योजना को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं।

प्रदर्शनकारी हाथ में तख्ती लिए नजर आए, जिस पर सशस्त्र बलों में रिक्त सभी पदों पर तत्काल स्थायी आधार पर भर्ती हो, अग्निपथ योजना वापस लें और मोदी सरकार जाग जाओ लिखा था। आईटीओ पर नारेबाजी भी की गई। प्रदर्शनकारियों ने अग्निपथ वापस लो, तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगाए। छात्रों के समूह ने दावा किया कि उसके कई सदस्यों को विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 17 से 18 युवक विरोध प्रदर्शन के लिए आईटीओ पर जमा हुए। उन्हें हिरासत में लेकर तत्काल इलाके से हटा दिया गया।

आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन. साई बालाजी ने कहा कि हम अग्निपथ योजना को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि इससे रक्षा क्षेत्र में नौकरियों संविदा आधारित हो जाएंगी। मोदी सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए शर्म आनी चाहिए।

दिल्ली दंगे में 53 लोगों की हुई थी मौत

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच संघर्ष के बाद 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सांप्रदायिक दंगे भड़क गए थे। इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे। साथ ही सरकारी और निजी संपत्ति को भी काफी नुकसान पहुंचा था। उग्र भीड़ ने मकानों, दुकानों, वाहनों, एक पेट्रोल पम्प को फूंक दिया था और स्थानीय लोगों तथा पुलिस कर्मियों पर पथराव किया था। इस दौरान राजस्थान के सीकर के रहने वाले दिल्ली पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल की 24 फरवरी को गोकुलपुरी में हुई हिंसा के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी और डीसीपी-एसीपी सहित कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल गए थे। साथ ही आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश नाले में फेंक दी गई थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।