🙏 हर हर महादेव 🙏14 अक्टूबर 2026, बुधवार का दिन सनातन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आश्विन शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर एक ओर विनायक चतुर्थी का पावन व्रत है, वहीं शारदीय नवरात्रि की साधना अपने विशेष चरण में पहुंच रही है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन भगवान गणेश एवं आदिशक्ति की उपासना के लिए शुभ माना गया है।
आज का पंचांग
- विक्रम संवत : 2083
- शक संवत : 1948
- मास : आश्विन
- पक्ष : शुक्ल
- तिथि : चतुर्थी (15 अक्टूबर रात्रि 1:13 बजे तक)
- नक्षत्र : अनुराधा (15 अक्टूबर प्रातः 4:03 बजे तक)
- योग : आयुष्मान रात्रि 8:39 बजे तक, तत्पश्चात सौभाग्य
- सूर्योदय : प्रातः 6:34 बजे
- सूर्यास्त : सायं 6:14 बजे
- राहुकाल : दोपहर 12:25 से 1:52 बजे तक
- दिशाशूल : उत्तर दिशा
धार्मिक मान्यता के अनुसार चतुर्थी तिथि पर मूली का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही चातुर्मास में तांबे एवं कांसे के पात्रों के उपयोग से बचने तथा पलाश के पत्तों पर भोजन करने का विशेष महत्व बताया गया है।
विनायक चतुर्थी का महत्व
शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान श्रीगणेश की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। विघ्नहर्ता गणेश की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। भक्त इस दिन विधिपूर्वक गणेश पूजन, व्रत और स्तोत्र पाठ कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
उपांग ललिता व्रत : आदिशक्ति की कृपा का पर्व
15 अक्टूबर 2026 को मनाया जाने वाला उपांग ललिता व्रत देवी उपासकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। माता ललिता को दस महाविद्याओं में से एक स्वरूप माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माता सती ने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर देह त्याग दिया और भगवान शिव उनके शरीर को लेकर विचरण करने लगे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर का विभाजन किया। भगवान शिव के हृदय में सदैव विराजमान रहने के कारण देवी को ‘ललिता’ नाम से संबोधित किया गया।
मान्यता है कि उपांग ललिता पंचमी पर व्रत, उपवास एवं पूजा करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन ललिता सहस्रनाम तथा ललिता त्रिशती का पाठ करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है तथा जीवन में सुख, समृद्धि एवं शांति का वास होता है।
शारदीय नवरात्रि : पंचमी का महत्व
नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और भक्तों को सुख, शांति एवं आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करती हैं।
धर्मग्रंथों में वर्णित है कि स्कंदमाता की पूजा से मनुष्य के भीतर नेतृत्व क्षमता, साहस और आत्मबल का विकास होता है। साधकों को इस दिन अपने मन को विशुद्ध चक्र में एकाग्र कर देवी का ध्यान करना चाहिए।
केले का भोग लगाने से मिलता है शुभ फल
नवरात्रि की पंचमी तिथि पर मां दुर्गा को केले का भोग अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
आज का विशेष संदेश
आज का दिन भगवान गणेश तथा मां दुर्गा की आराधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करता है। विनायक चतुर्थी, नवरात्रि पंचमी और उपांग ललिता व्रत का यह पावन संयोग भक्तों के लिए शुभ फलदायी माना जाता है। श्रद्धा एवं विश्वास के साथ किए गए पूजा-पाठ, जप और व्रत से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है।
जय श्री गणेश।
जय माता दी।
हर हर महादेव। 🚩🙏🏻