देश के पहले लेखक गांव में ‘संवेदना अभियान’ का संकल्प, डॉ. निशंक के जन्मदिवस पर 200 यूनिट रक्तदान

 

देहरादून, 15 जुलाई। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के जन्मदिवस पर “संवेदना अभियान” के अंतर्गत देश के पहले लेखक गांव थानों (देहरादून) में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में 200 यूनिट रक्तदान किया गया।

छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, कर्मचारियों और क्षेत्रवासियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने समाज के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय सरोकारों का सशक्त संदेश दिया। हिमालयीय आयुर्वेदिक (पी.जी.) मेडिकल कॉलेज, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय, भागीरथ प्रयास फाउंडेशन, रुड़की तथा देवभूमि ब्लड बैंक, देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में सेवा, साहित्य, संस्कृति और सामाजिक दायित्व का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

सर्वप्रथम लेखक गांव स्थित श्री नरसिंह भगवान मंदिर में विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना एवं हवन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के साथ उनकी पुत्री डॉ. आरुषि निशंक, विदुषी निशंक, अभिनव पंत, मेजर देवल वाजपेयी, आर्यन देव उनियाल सहित अनेक परिवारजन भी उपस्थित रहे और सभी ने धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता की। इस अवसर पर डॉ निशंक द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया।

इसके उपरांत नालंदा पुस्तकालय शोध एवं अनुसंधान केंद्र में आयोजित बाल कवि गोष्ठी में सनराइज अकादमी एवं एंजेल अकैडमी बहादराबाद के छात्र-छात्राओं ने डॉ. निशंक की चर्चित बाल रचनाओं “भोर की किरण”, “बारिश की फुहार”और “प्रकृति का उपहार” सहित अन्य कविताओं का भावपूर्ण पाठ कर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएँ दीं। विद्यार्थियों ने संस्कृत में जन्मदिवस गीत प्रस्तुत कर भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक भी प्रस्तुत की। बच्चों ने “बार-बार दिन ये आए” प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को उल्लास और आत्मीयता से भर दिया। डॉ. निशंक ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें साहित्य, शिक्षा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रेरित किया।

रक्तदान शिविर में रक्तदाताओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए हेलमेट भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों ने प्रसाद ग्रहण किया।

अपने संबोधन में डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा, “संवेदना ही मानव जीवन का सबसे बड़ा मूल्य है। रक्तदान केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवता के प्रति हमारी करुणा, सेवा और समर्पण का प्रतीक है। एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। यदि प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति नियमित रूप से रक्तदान का संकल्प ले, तो अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं।” उन्होंने युवाओं से समाजसेवा और स्वैच्छिक रक्तदान जैसे अभियानों से निरंतर जुड़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर पद्मश्री प्रेमचंद शर्मा, पद्मा श्री बी.के.एस संजय, डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला, बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, शोभाराम प्रजापति, डॉ. जयपाल सिंह, सुभाष बर्थवाल, रुड़की की महापौर अनीता अग्रवाल, हरिद्वार जिला अध्यक्ष आशुतोष शर्मा, रुड़की जिलाध्यक्ष डॉ. मधु सिंह, ऋषिकेश जिला अध्यक्ष राजेंद्र तड़ियाल डोईवाला नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र सिंह नेगी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जन्मदिवस के अवसर पर दिनभर साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और नागरिकों का डॉ. निशंक को शुभकामनाएँ देने के लिए तांता लगा रहा। सभी ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की कामना करते हुए “संवेदना अभियान” को समाज में और अधिक व्यापक रूप से आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।

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