“गणित: जीवन को समझने और आशा बनाए रखने की कला”

पौड़ी। हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के डा.बीजीआर परिसर पौड़ी में अन्तर्राष्ट्रीय गणित दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ परिसर निदेशक पोफेसर उमेश चन्द्र गैरोला ने दीप प्रज्वलन के साथ किया।इस अवसर पर उन्होंने इसे वर्ष की अन्तर्राष्ट्रीय गणित दिवस की थीम ” गणित एवं आशा” पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि हम गहराई से विचार करें तो पाएंगे कि गणित केवल एक शैक्षणिक विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन को समझने और आशा को बनाए रखने की एक अद्भुत कला भी है।
गणित हमें सिखाता है – हर समस्या का समाधान संभव है
गणित की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह हमें विश्वास दिलाता है कि हर समस्या का कोई न कोई समाधान अवश्य होता है।
कभी-कभी समाधान तुरंत नहीं मिलता, परंतु इसका अर्थ यह नहीं कि समाधान है ही नहीं। इसका अर्थ केवल इतना है कि हमें और अधिक सोचने, नए तरीके अपनाने और धैर्य रखने की आवश्यकता है।
यह सोच केवल गणित तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हमारे जीवन का भी हिस्सा बन जाती है।
कठिन प्रश्न ही हमें मजबूत बनाते हैं
जब विद्यार्थी गणित पढ़ते हैं तो अक्सर उन्हें कुछ प्रश्न बहुत कठिन लगते हैं। क ार ऐसा भी होता है कि हम एक प्रश्न को कई बार प्रयास करने के बाद भी हल नहीं कर पाते।
लेकिन यही कठिन प्रश्न हमें सोचने की क्षमता, धैर्य और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।
जैसे एक प्रसिद्ध कथन है:
“गणित हमें यह नहीं सिखाता कि समस्याएँ नहीं होंगी, बल्कि यह सिखाता है कि समस्याओं का सामना कैसे करना है।”
असफल प्रयास भी सफलता का हिस्सा हैं
गणित में यदि कोई प्रश्न पहली बार में हल नहीं होता तो हम उसे फिर से प्रयास करते हैं।
नया तरीका अपनाते हैं
परिभाषाओं को दोबारा समझते हैं
प्रमेयों का प्रयोग करते हैं
कई बार दस प्रयासों के बाद समाधान मिलता है।

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