हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बी.जी.आर. परिसर, पौड़ी स्थित संस्कृत विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यान श्रृंखला का चतुर्थ एवं अंतिम व्याख्यान दिनांक 13 मार्च 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण के साथ किया गया।
कार्यक्रम का संचालन अंग्रेज़ी विभाग के डॉ. धर्मेन्द्र कुमार द्वारा किया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. दिनेश चंद्र पाण्डेय ने मुख्य वक्ता का परिचय उपस्थित प्रतिभागियों के समक्ष प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. कंचन तिवारी ने “दर्शन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि दर्शन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी एक-दूसरे से गहराई से अंतर्संबंधित हैं तथा मानव सभ्यता के विकास में इन तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने विशेष रूप से दर्शन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दर्शन सभी ज्ञान-विषयों से जुड़ा हुआ है और यह विचार तथा ज्ञान की दिशा निर्धारित करता है।
डॉ. तिवारी ने भारतीय दर्शन के विभिन्न आयामों को विस्तार से स्पष्ट किया और इसकी बारीकियों से श्रोताओं को अवगत कराया। साथ ही उन्होंने शब्द-विज्ञान के संदर्भ में भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की समन्वयिका प्रो. कुसुम डोबरियाल ने मुख्य वक्ता का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उनके व्याख्यान को अत्यंत प्रासंगिक एवं सारगर्भित बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे परिसर निदेशक प्रो. यू. सी. गैरोला ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए दर्शन और विज्ञान के अंतर्संबंधों पर अपने विचार श्रोताओं के साथ साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में अर्थशास्त्र विभाग के डॉ. विपुल सिंह ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। उपस्थित श्रोताओं ने व्याख्यान के विषय को समसामयिक एवं अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए इसकी सराहना की.