एम्स ऋषिकेश में महिला चिकित्सक से छेड़छाड़ के मामले में आयोग अध्यक्ष ने डीएम देहरादून को किया निर्देशित, मामलें की जांच कमेटी गठित करें

ऋषिकेश, 21 मई:* अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में सर्जरी विभाग में तैनात एक महिला चिकित्सक के साथ आपरेशन के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक पुरुष नर्सिंग आफिसर द्वारा छेड़ खानी के मामले की सूचना मिलते ही उत्तराखंड राज्य महिला आयोग एक्शन मोड में आ गया है। मामले में राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष कुसुम कंडवाल मौके पर एम्स ऋषिकेश पहुंची और आईसीसी कमेटी व डीन डॉ जाया चतुर्वेदी तथा पीड़िता व उसकी सहयोगी महिला चिकित्सकों से मिलकर मामले की जानकारी ली उन्होंने मौके पर एम्स प्रशासन को कड़ी कार्रवाई की बात कही है।

एम्स ऋषिकेश के सर्जरी विभाग के आपरेशन थिएटर की यह घटना बीते रविवार 19 मई शाम 7:00 बजे की बताई गई है। नर्सिंग आफिसर सतीश कुमार पर आरोप है कि उसने आपरेशन के दौरान महिला चिकित्सक के साथ छेड़छाड़ की तथा वह चिकित्सक पर चिल्लाया पीड़िता का नर्सिंग आफिसर पर आरोप है कि इसने महिला चिकित्सक को अनुचित तरीके से छेड़ने की कोशिश की। उसके बाद व्हाट्सएप पर उसने आपत्तिजनक मैसेज भेजें, धमकी के तौर फांसी लगाने के प्रयास की फोटो भेज कर चिकित्सक का मानसिक उत्पीड़न किया।

मामले में आयोग अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने डीएम देहरादून को निर्देशित किया है कि ऐसे संवेदनशील मामलें में आयोग की ओर से तत्काल जांच कमेटी गठित करें। जिसमें सीडीओ, डीपीओ तथा लीगल एडवाइजर व एक सदस्य रहेंगे।

मामले में डीन ने जानकारी दी कि महिला चिकित्सक की ओर से इस मामले की शिकायत आंतरिक चिकित्सा प्रकोष्ठ (ICC कमेटी) में भी की गई जिसकी प्रक्रिया के दौरान 20 मई को सुबह चिकित्सक सतीश कुमार की तबियत बिगड़ने पर उसे भर्ती किया गया तथा एम्स प्रशासन द्वारा उसे 20 मई की शाम तक सस्पेंड कर दिया गया।

वहीं महिला चिकित्सक की साथी चिकित्सकों के द्वारा घटना की जानकारी दिए जाने पर महिला आयोग की अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि असिस्टेंट नर्सिंग सुप्रीमटेंडेंट सिनोज़ पी. द्वारा उक्त आरोपी सतीश कुमार को शिकायत के बाद भी ड्यूटी पर भेजने के कारण में जांच चलने तक निलंबित किया जाए तथा अध्यक्ष कण्डवाल ने एम्स डायरेक्टर मीनू सिंह से फोन पर वार्ता करते हुए सभी आरोपियों के विरुद्ध खिलाफ गहन जांच कराने के लिए कहा है।

जिस पर एम्स प्रशासन ने ए.एन.एस. को जांच चलने तक हुए नोटिस दिया है तथा 72 घंटे में जवाब देने के लिए निर्देशित किया है।

इस मौके पर डायरेक्टर इंचार्ज एम्स ऋषिकेश डॉ जया चतुर्वेदी, डीन प्रोफेसर शैलेंद्र हांडू, प्रो. संजीव मित्तल, लॉ ऑफीसर प्रदीप चंद पांडे, चीफ नर्सिंग ऑफिसर डॉ रीता शर्मा उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।