बिट्टू चिल्लाती रही …हमें बचा लो परंतु किसी ने नहीं सुनी उनकी चीख-पुकार !!!

अंकल-आंटी हमें बचा लो पापा ने मम्मी को मार दिया है। दीदी को काट रहे हैं…बचा लो…बचा लो…। घर के अंदर पिता की हैवानियत और सामने पड़ी मां और बहन की लाश देखकर यह पुकार थी सबसे छोटी बेटी अन्नपूर्णा उर्फ बिट्टो की। इसे सुना बाहर से गुजर रहे सुशील जायसवाल और उनकी पत्नी ने।लेकिन, वह समझ ही नहीं पाए कि बिट्टो आखिर ऐसा क्यों कर रही है। सुशील दुखी होते हुए बताते हैं कि उन्हें जिंदगी भर इस बात का मलाल रहेगा कि जिन्हें वह अपने बच्चों की तरह प्यार करते थे, उनकी पुकार को वह समझ नहीं पाए।सुशील ने बताया कि काश अगर वह उसी वक्त किसी को बुलाकर दरवाजा तोड़ देते तो शायद कुछ जिंदगियां बच जाती। उन्होंने बताया कि वह सोमवार सुबह करीब सात बजे अपनी पत्नी के साथ मंदिर से लौट रहे थे। तभी महेश के घर से बिट्टो की आवाज आई। वह चिल्ला रही थी कि अंकल बचा लो। पापा ने मम्मी को मार दिया है। सबको मार रहे हैं ।सुशील कहते हैं कि वह समझ ही नहीं पाए कि बिट्टो ऐसा क्यों कर रही है। उन्हें लगा शायद घर में कोई झगड़ा हुआ है। लेकिन, फिर सुशील की पत्नी ने बोला कि बिट्टो कभी ऐसा नहीं करती है। जरा देखो हुआ क्या है। इस पर सुशील घर की बाउंड्री वाल फांदकर अंदर गए और दरवाजा खोलने का प्रयास किया, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था।उन्होंने खिड़की से अंदर देखा तो आंखें फटी की फटी रह गईं। उन्होंने देखा कि महेश ने बिट्टो को मार दिया था और अब अपनी मां को मार रहा था। उन्होंने एसओ को फोन किया तो पुलिस पहुंची, लेकिन तब तक मौत का सन्नाटा पूरे घर में पसर चुका था।सुशील बताते हैं कि ऐसा मंजर देख और बिट्टो की पुकार को यादकर वह बेहद दुखी हो जाते हैं। शायद वह इसे पूरी जिंदगी नहीं भूल पाएंगे। इस घटना से पूरे मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा है कि कोई व्यक्ति इस तरह से अपने पूरे परिवार को मार सकता है।उसकी मझली बेटी सुवर्णा दिव्यांग थी। वह बेहद कम चल पाती थी। सोमवार सुबह वह भी अपनी मां के साथ रसोई में थी। पहले आरोपी ने अपनी पत्नी को मार डाला। इसके बाद बड़ी बेटी को। उसे पता था कि सुवर्णा चल नहीं सकती है। तब तक बिट्टो खिड़की के पास शोर मचाने लगी थी। इस पर उसने रसोई में रो रही अपनी दिव्यांग बेटी का गला रेता और फिर बिट्टो को खत्म कर दिया।

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