कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा से किया गया निलंबित, सभापति ने कहा…. “अधीर रंजन चौधरी का बर्ताव सदन के अनुरूप नहीं था”

10 अगस्त 2023 : लोकसभा में कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से अस्वीकार कर दिया गया है। इस बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को लोकसभा से निलंबित कर दिया गया है। यह निलंबन तब तक के लिए किया गया है जब तक कि विशेषाधिकार समिति उनके खिलाफ अपनी रिपोर्ट पेश नहीं कर देती। जानकारी के मुताबिक यह मामला प्रिविलेज समिति के पास लंबित है। इस मामले की जांच होने तक अधीर रंजन चौधरी सस्पेंड रहेंगे। अधीर रंजन को लेकर संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस नेता हर बार देश की छवि को खराब करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने उसी दौरान उनसे माफी की मांग की थी, लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी। इसके बाद अधीर रंजन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया जिसे स्पीकार ने स्वीकार कर लिया।’ सभापति ने भी यह कहा कि अधीर रंजन चौधरी का बर्ताव सदन के अनुरूप नहीं था। सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधीर रंजन चौधरी पर निशाना साधा था। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘अधीर रंजन चौधरी गुड़ का गोबर करने में माहिर हैं। न जानें क्यों कांग्रेस बार-बार उनका अपमान करती है। क्या पता दफ्तर से फोन आया हो। बता दें कि गौरव गोगोई के बयान पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री ने अधीर रंजन चौधरी पर निशाना साधा। पीएम ने कहा कि हम अधीर रंजन चौधरी को लेकर पूरी संवेदना रखते सभापति ने ध्वनि मत के आधार पर भाजपा के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। इससे पहले आज दिन की शुरुआत में अधीर रंजन चौधरी ने नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा था कि ये अविश्वास प्रस्ताव की ही ताकत है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में खींच लाई है। बता दें कि सदन की कार्यवाही को फिलहाल के लिए रद्द कर दिया गया है। इसी कड़ी में जांच पूरा होने तक अधीर रंजन चौधरी निलंबित रहेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।