उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा की अध्यक्षता में बोर्ड बैठक का आयोजन

देहरादून , उत्तराखण्ड राज्य महिला आयोग की मा० अध्यक्ष श्रीमती कुसुम कण्डवाल की अध्यक्षता में आयोग कार्यालय परिसर में बोर्ड बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का संचालन आयोग की सदस्य सचिव श्रीमती कामिनी गुप्ता द्वारा किया गया। बैठक के दौरान आयोग की मा० उपाध्यक्ष, श्रीमती ज्योति (साह) मिश्रा, अल्मोडा एवं मा० उपाध्यक्ष, श्रीमती शायरा बानो ऊधमसिंह नगर एवं आयोग के विधि अधिकारी, श्रीमती दयाराम सिंह एवं श्रीमती शानू रावत, कनिष्ठ सहायक द्वारा प्रतिभाग किया गया। बोर्ड बैठक में माननीय सदस्यों के रिक्त पदों को भरने हेतु शासन स्तर पर पत्राचार किये जाने, दूर-दराज क्षेत्रों से देहरादून का सिलिंग/परामर्श लेने हेतु पहुँचने वाली पीडित महिलाओं के कम से कम एक सप्ताह रूकने हेतु 10 से 12 कमरों की व्यवस्था शासन द्वारा की जाये, बन्द पडे स्वधार गृहों को संचालित किये जाने, शासन द्वारा आयोग को जागरूकता कार्यक्रम हेतु अतिरिक्त बजट उपलब्ध कराने, पूर्व अध्यक्ष की भांति निवर्तमान मा० अध्यक्ष महोदया के मानदेय में भी बढोत्तरी किये जाने एवं महंगाई को देखते हुए गाडी/पैट्रोल का किराया मी बढाये जाने सम्बन्धी गहनता पूर्वक विचार-विमर्श करते हुए प्रस्ताव पारित किये गए। इसके अतिरिक्त बैठक के दौरान यह भी बिन्दु प्रकाश में आया कि आयोग कार्यालय शहर से काफी दूर स्थित है, जिसमें महिलाओं को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पडता है। आयोग कार्यालय शहर के बीच में स्थित होना अति आवश्यक है। उक्त बिन्दु पर गम्भीरता से विचार करते हुए शासन स्तर पर पुनः पत्राचार किये जाने सम्बन्धी प्रस्ताव भी पारित किया गया। मा० अध्यक्ष महोदया द्वारा मा० उपाध्यक्षों को यह आदेशित किया गया कि वह स्वयं द्वारा किये गए समस्त कार्यों की मासिक रिपोर्ट बनाकर आयोग को प्रेषित करें। बैठक में स्पा सैण्टर से सम्बन्धित नियमावली पर भी शासन स्तर पर अतिशीघ्र नियमावली लागू किये जाने हेतु पुनः पत्राचार किया जायेगा। आयोग के विधि अधिकारी, श्री दयाराम सिंह द्वारा बैठक का समापन करते हुए समस्त पदाधिकारियों का धन्यवाद किया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।