*केयर इकॉनॉमी को सुदृढ़ बनाने पर देहरादून में पहली विशेष कार्यशाला*

*देहरादून 12 अगस्त 2026

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार एवं समाज कल्याण विभाग, उत्तराखण्ड के संयुक्त प्रयास से बुधवार को देहरादून में वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों के लिए पहली बार केयर इकॉनॉमी विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश में देखभाल सेवाओं को व्यवस्थित रूप से विकसित कर उन्हें अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा से जोड़ने तथा इसके माध्यम से रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर व्यापक मंथन किया गया।

 

केयर इकॉनॉमी के अंतर्गत लोगों की देखभाल, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा दैनिक जीवन से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने वाली आर्थिक गतिविधियां एवं सेवाएं शामिल हैं। इनमें बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, बीमार एवं दिव्यांगजनों की देखभाल, स्वास्थ्य सेवाएं, घरेलू कार्य, बाल देखभाल सहित विभिन्न देखभाल संबंधी सेवाएं प्रमुख हैं।

 

कार्यशाला में समाज कल्याण मंत्री खजान दास मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में परंपरागत रूप से वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों की देखभाल परिवार के सदस्य ही करते हैं, लेकिन बदलती सामाजिक परिस्थितियों में केयर इकॉनॉमी की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। एकल परिवारों की बढ़ती संख्या तथा महिला एवं पुरुष दोनों के नौकरीपेशा होने से पेशेवर देखभाल सेवाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे में केयर इकॉनॉमी युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में युवाओं के पलायन के कारण पर्वतीय क्षेत्रों के अनेक गांवों में वरिष्ठ नागरिक अपेक्षाकृत अकेले रह जाते हैं। ऐसे में उनकी सामाजिक, भावनात्मक एवं दैनिक आवश्यकताओं की देखभाल के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केयर इकॉनॉमी को मजबूत बनाने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संगठनों, विशेषज्ञों और सिविल सोसाइटी को मिलकर कार्य करना होगा।

 

कार्यशाला में बताया गया कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की संख्या 10.38 करोड़ थी, जो कुल आबादी का लगभग 8.6 प्रतिशत थी। अनुमान है कि वर्ष 2050 तक प्रत्येक पांच में से एक व्यक्ति 60 वर्ष से अधिक आयु का होगा तथा वरिष्ठ नागरिकों की संख्या लगभग 35 करोड़ तक पहुंच सकती है। ऐसे में गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ देखभाल सेवाओं की आवश्यकता भविष्य में और अधिक बढ़ने की संभावना है।

 

कार्यशाला में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, ग्राम्य विकास एवं वित्त विभाग के अधिकारियों के साथ विषय विशेषज्ञों, वरिष्ठ नागरिकों तथा दिव्यांगजन कल्याण के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया। लतिका रॉय फाउंडेशन एवं हैप्पी फैमिली हेल्थ केयर एंड रिसर्च एसोसिएशन सहित विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों की ओर से केयर इकॉनॉमी से संबंधित विषयों पर प्रस्तुतियां दी गईं।

 

कार्यक्रम में सचिव डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, निदेशक समाज कल्याण संजय कुमार, अपर सचिव सुंदलाल सेमवाल, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया, अपर सचिव मनमोहन मैनाली, संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल, मुख्य वित्त नियंत्रक पूजा नेगी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे

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