भारत छोड़ो आंदोलन की प्रेरणा से 13 जनपदों में पेंशन उपवास कार्यक्रम आयोजित*, 13 सितंबर को देहरादून में होगी ऐतिहासिक पेंशन रैली

देहरादून, 09 अगस्त 2026: पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन (NMOPS), उत्तराखंड के आह्वान पर आज प्रदेश के सभी 13 जनपदों में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर पेंशन उपवास कार्यक्रम आयोजित किया गया।

 

जनपद देहरादून में यह कार्यक्रम शहीद स्मारक कचहरी परिसर देहरादून में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी, शिक्षक एवं पेंशन समर्थक शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए जिलाध्यक्ष सन्तोष गडोहि ने कहा कि इस दिन उपवास कार्यक्रम का आयोजन 9 अगस्त 1942 को प्रारंभ हुए ऐतिहासिक भारत छोड़ो आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए किया गया। साथ ही उत्तराखंड राज्य आंदोलन के शहीदों की शहादत और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेते हुए कर्मचारियों ने अपने अधिकार एवं सुरक्षित भविष्य के लिए संघर्ष का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में उपस्थित कर्मचारियों ने एक स्वर में “NPS-UPS छोड़ो, पुरानी पेंशन OPS लागू करो” का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन केवल कर्मचारियों की मांग नहीं, बल्कि उनके सामाजिक एवं आर्थिक भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।

इस अवसर पर NMOPS उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष श्री जीतमणि पैनूली ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर प्रदेश के कर्मचारी पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के भविष्य की सामाजिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था को पुनः लागू किया जाना आवश्यक है।

प्रांतीय महामंत्री इंजीनियर मुकेश रतूड़ी ने कहा कि आज प्रदेश के सभी 13 जनपदों में आयोजित पेंशन उपवास कार्यक्रम कर्मचारियों की एकजुटता और संघर्ष की मजबूत भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि NMOPS उत्तराखंड शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से पुरानी पेंशन बहाली की लड़ाई को आगे बढ़ाता रहेगा।

उत्तराखण्ड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ रायपुर के अध्यक्ष अरविन्द सोलंकी ने कहा कि पुरानी पेंशन प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है और कर्मचारी पुरानी पेंशन लेकर रहेंगे।

*13 सितंबर को होगी पेंशन संगठित रैली*

कार्यक्रम में वक्ताओं ने आगामी 13 सितंबर 2026 को देहरादून में आयोजित होने वाली विशाल पेंशन संगठित रैली की घोषणा करते हुए कहा कि इस रैली को ऐतिहासिक बनाया जाएगा। रैली में प्रदेश के सभी 13 जनपदों से हजारों की संख्या में कर्मचारी, शिक्षक एवं पेंशन समर्थक देहरादून पहुंचेंगे।

वक्ताओं ने कहा कि 13 सितंबर की रैली में कर्मचारियों की एकजुटता का विशाल प्रदर्शन किया जाएगा तथा मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर सरकार से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को मजबूती से उठाया जाएगा।

सभी जनपदों के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया गया कि वे अभी से तैयारियों में जुट जाएं और 13 सितंबर को अधिक से अधिक संख्या में देहरादून पहुंचकर “NPS-UPS छोड़ो, OPS लागू करो” के संकल्प को मजबूत करें।

 

*कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित*

कार्यक्रम में श्री जीतमणि पैनूली प्रदेश अध्यक्ष; श्रीमती उर्मिला द्विवेदी प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ; इंजीनियर मुकेश रतूड़ी प्रांतीय महामंत्री; इंजीनियर शांतनु शर्मा प्रांतीय कोषाध्यक्ष; सूर्य सिंह पंवार प्रांतीय प्रवक्ता; इंजीनियर जगमोहन सिंह रावत वरिष्ठ उपाध्यक्ष; श्री राकेश जोशी उपाध्यक्ष सचिवालय संघ; श्री चौहान अध्यक्ष श्री धरम सत्तू महासचिव समीक्षा अधिकारी संघ सचिवालय; इंजीनियर मुकेश रमोला, प्रांतीय महासचिव RWD; श्री संतोष गड़ोही जनपद अध्यक्ष देहरादून; श्री पुष्कर राज बहुगुणा , प्रभारी NMOPS गढ़वाल मंडल; इंजीनियर यशवंत सिंह रावत, उत्तराखण्ड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ रायपुर के अध्यक्ष अरविन्द सोलंकी, विकासनगर के मंत्री कमल सुयाल, महासचिव जल संस्थान; श्री राजेंद्र रतूड़ी, महासचिव सचिवालय संघ सहित अनेक पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त उपाध्यक्ष अरविंद थपलियाल, सूर्य प्रकाश, अंशुमन चौहान, मोहम्मद इरशाद, राजकुमार, प्रेम सिंह, रिजवान हुसैन, रणवीर सिंह राय, वीरेंद्र सिंह चौहान, दिनेश कुमार, अब्दुल गफार, जिशान अली, पिंकेश रावत, प्रताप सिंह, फतेह सिंह चौहान, सरदार सिंह, सुरेंद्र कुमार, गुलाब सिंह, चंदन सिंह रावत, रजनी रावत, जगमोहन सिंह नेगी, निर्मल सिंह, कपिल चौहान, संगीता, हरीश चंद्र पांडे, आत्माराम शर्मा, दलित चंद्र जोशी, सुरेश कुमार, होशियार सिंह गुसाईं , तारकेश्वर यादव, ओकम सिंह चौहान, अनुज सेखर, हितेंद्र नेगी, गणेश डंगवाल एवं नरेंद्र नौटियाल सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।