ग्राम प्रधानों के प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी को सोपा ज्ञापन 

 

पातल/पाबो /पौड़ी l ग्राम पंचायत पातल के प्रधान सुभाष सुयाल के नेतृत्व में अनेक ग्राम प्रधानों वह समाजसेवियों का प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी पौड़ी से मिलाl प्रतिनिधि मंडल ने भारी प्रदेशों से आ रहे के मजदूरी दर तय करने को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सोपा । प्रतिनिधि मंडल ने कहा कि प्रदेश के पहाड़ी ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों की तादाद में बाहरी मजदूर आए हुए हैं वह वह अपनी मजदूरी मनमाने ढंग से मांग रहे हैं । जिस कारण आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है वह ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं ।

उनका कहना था की नेपाल बिहार पश्चिम बंगाल एवं अनेक राज्यों से आने वाले श्रमिक एवं मिस्त्री हमारे क्षेत्र में निर्माण कार्य करते हैं लेकिन यह अपनी मजदूरी मनमाने ढंग से लगातार बढ़ते जा रहे हैं । उनका कहना है की पूर्व की भांति मनरेगा के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की निर्धारित मजदूरी दर 252 प्रतिदिन है जबकि भारी श्रम एक 600 से 800 तक की मजदूरी मांग रहे हैं साथ ही मनरेगा के अंतर्गत मिस्त्री की निर्धारित मजदूरी 396 प्रतिदिन है जबकि बाहरी मिस्त्री प्रतिदिन ₹1000 से अधिक वसूल रहे हैं ।

पहाड़ी क्षेत्रों में अनेक अपराधिक घटनाओं के चलते प्रतिनिधि मंडल ने जिलाधिकारी महोदय से मांग की की भारी राज्यों से आने वाले श्रमिकों में मिस्रियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से करवाया जाए एवं तत्पश्चात उनको पहचान पत्र जारी किए जाएं ताकि भविष्य में होने वाली किसी अप्रिय घटना की स्थिति में उनकी पहचान एवं आवश्यक कार्यवाही आसानी से की जा सके l

उत्तराखंड की प्रति व्यक्ति आय एवं स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भारी श्रमिकों एवं स्त्रियों की मजदूरी का उचित मानक निर्धारित किया जाना अनिवार्य है ।

जिलाधिकारी महोदय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और अस्वस्थ किया कि इस मामले को आवश्यक कार्यवाही हेतु संबंधित विभाग को प्रेषित किया जाएगा एवं इस पर अति शीघ्र निर्णय लिया जाएगा ।

प्रतिनिधि मंडल में ग्राम पंचायत प्रधान सुभाष चंद्र सुयाल ग्राम पंचायत बादल, अरुण जोशी ग्राम प्रधान गडरिया, शकुंतला देवी ग्राम प्रधान क्यार्द, प्रहलाद सिंह ग्राम प्रधान गीठाली, रोशन लाल ग्राम प्रधान चोरकंडी, यशवंत सिंह, राजेंद्र सिंह, धनेश चमोली आदि सम्मिलित थे ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।