*चारधाम यात्रा की तैयारियों को परखने के लिए अब 24 अप्रैल को होगा मॉक अभ्यास

*चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं का प्रभावी तरीके से सामना करने तथा चारधाम यात्रा को लेकर आईआरएस (इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम) प्रणाली के तहत विभिन्न रेखीय विभागों की तैयारियों का धरातलीय परीक्षण के उद्देश्य से 22 अप्रैल, मंगलवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा टेबल टॉप एक्सरसाइज की गई। जिसमें चारधाम यात्रा के दौरान सभी विभागों एवं अधिकारियों के दायित्वों एवं कर्तव्यों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए। आगामी 24 अप्रैल 2025 को तैयारियों को परखने के लिए मॉक अभ्यास भी किया जाएगा।

टेबलटॉप एक्सरसाइज के दौरान खराब मौसम, बाढ़, भूस्खलन, भूकंप, अग्निकांड, हिमस्खलन, बर्फबारी, भारी वर्षा, हेलीकॉप्टर व रोड एक्सीडेंट, भगदड़ आदि आपदाओं के दौरान विभाग द्वारा आपस में बेहतर समन्वय रखते हुए राहत और बचाव के कार्याे का प्रभावी तरीके से संचालन करने के निर्देश दिए गए। साथ ही इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम के अंतर्गत नामित नोडल एवं सेक्टर अधिकारी को उनके दायित्वों के बारे में विस्तार से बताया। 24 अप्रैल को आपदा की विभिन्न परिस्थितियों पर आधारित मॉक अभ्यास का आयोजन कर तैयारियों को परखा जाएगा। एनडीएमए के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इस एक्सरसाइज से यह जानना और समझना आसान होगा कि विभिन्न स्तरों पर वास्तविक स्थिति और विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय कैसा है। यदि कहीं कोई तकनीकी या अन्य दिक्कत आएगी तो उसका तुरंत समाधान किया जाएगा। ताकि यात्रा के दौरान कहीं किसी भी स्तर पर कोई कमी न रहे। इस दौरान सभी जनपदों से चारधाम यात्रा की तैयारियों के बारे में विस्तृत चर्चा की गई। देहरादून जनपद से अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह, एसपी आरए जया बलूनी, मुख्य शिक्षा अधिकारी वीके ढ़ौडियाल, एसीएमओ डा सीएस रावत सहित सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने टेबल टॉप एक्सरसाइज में प्रतिभाग किया।

*कहा कब खुलेंगे के कपाट*
गंगोत्री यमुनोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को, केदारनाथ धाम के कपाट 02 मई तथा बद्रीनाथ धाम के कपाट 04 मई को खुलेंगे। वही 25 मई को हेमकुंड साहिब के कपाट खुलेंगे। पूरे विधि विधान के साथ में कपाट खोलने की तैयारियां चल रही है। राज्य सरकार चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा मुहैया कराने में जुटी है। ताकि देवभूमि से सभी श्रद्धालु एक अच्छा संदेश लेकर जाए।

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