एक्साइज पॉलिसी को लेकर उपराज्यपाल और सरकार के बीच टकराव, सिसोदिया बोले- दुकानें खुलने से पहले LG ने बदला स्टैंड – Nikhil Chetna

एक्साइज पॉलिसी को लेकर उपराज्यपाल और सरकार के बीच टकराव, सिसोदिया बोले- दुकानें खुलने से पहले LG ने बदला स्टैंड

नई दिल्ली। उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया ने शनिवार को नई एक्साइज पॉलिसी के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पास पॉलिसी में अप्रत्यक्ष तौर पर फेरबदल किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मई, 2021 में नई एक्साइज पॉलिसी को पास किया था। उसमें हमने लिखा था कि पहले की पॉलिसी में 849 दुकानें थी। ऐसे में इस पॉलिसी में लिखा गया था कि दिल्ली में दुकानों की संख्या को बढ़ाया नहीं जाएगा बल्कि 849 दुकानें ही रहेंगी। पुरानी पॉलिसी में दुकानें बेढ़ंगे तरीके से बंटी हुई थी। इसलिए नई एक्साइज पॉलिसी में कहा गया कि दुकानों को बराबरी से बांटा गया।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नई एक्साइज पॉलिसी को मंजूरी देने से पहले उपराज्यपाल साहब ने इसे ध्यान से पढ़ा और इसे लेकर कई महत्वपूर्ण और बड़े सुझाव दिए। जिसके बाद उनके सुझावों पर अमल करते हुए कैबिनेट ने पॉलिसी में बदलाव किया और जून में उपराज्यपाल के पास पॉलिसी को भेजा। जिसके बाद उपराज्यपाल साहब ने पॉलिसी को मंजूरी दी।

उन्होंने कहा कि एक्साइज पॉलिसी को लेकर उपराज्यपाल ने सभी सुझाव माने लेकिन दुकानें खुलने की फाइल उपराज्यपाल के पास पहुंची तो फिर निर्णय बदल दिया गया। नवंबर के पहले सप्ताह में उपराज्यपाल के पास प्रस्ताव भेजा गया क्योंकि 17 नवंबर को दुकानें खुलने थी लेकिन 15 नवंबर को उपराज्यपाल ने एक नई शर्त लगा दी कि अवैध कालोनियों में दुकान खोलने के लिए डीडीए और एमसीडी की मंजूरी लेनी चाहिए।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि अवैध कालोनियों में एक्साइज पॉलिसी के तहत हमेशा दिल्ली में दुकानें खुलती रही हैं। 2015 से पहले की मैंने फाइल देखी हैं। हर साल उपराज्यपाल के पास अवैध कालोनियों में दुकानें खोलने के लिए फाइलें गई हैं तो उसे मंजूरी मिलती रही है। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने अचानक ही अपना स्टैंड चेंज किया। जिसकी वजह से अवैध कालोनियों में दुकान नहीं खुल पाईं और पुरानी पॉलिसी के हिसाब से जो दुकानें खुल रही थीं वो भी नहीं खुल पाई और मामला कोर्ट पहुंचा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।