प्रदेशभर से जुटे प्राथमिक शिक्षक, पुरानी पेंशन बहाली और TET की अनिवार्यता समाप्त करने की उठी मांग

 

देहरादून, 13 सितम्बर।

NMOPS के आह्वान पर रविवार को देहरादून में आयोजित मुख्यमंत्री आवास घेराव कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में प्राथमिक शिक्षक एवं शिक्षक संगठनों के पदाधिकारी पहुंचे। भारी बारिश के बावजूद शिक्षकों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हुए TET की अनिवार्यता समाप्त करने तथा नई पेंशन योजना (NPS) के विरोध में पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

 

मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से पहुंचे शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। शिक्षकों का कहना था कि वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए TET से संबंधित समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। साथ ही कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

 

कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ जिलाध्यक्ष देहरादून धर्मेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि शिक्षक समुदाय अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि TET की अनिवार्यता एवं NPS के मुद्दे पर सरकार को शिक्षक-कर्मचारी हितों को ध्यान में रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारी बारिश के बावजूद प्रदेशभर से शिक्षकों का बड़ी संख्या में पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह एकजुट हैं।

 

इस दौरान अल्मोड़ा के जिलाध्यक्ष किशोर जोशी, चमोली के जिलाध्यक्ष दिगम्बर सिंह नेगी, टिहरी के जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह नेगी, मनोज बिष्ट, गोपाल भट्टाचार्य, दर्शन सिंह पंवार (मंत्री, हरिद्वार), सिद्धार्थ शर्मा, शशांक शर्मा, अनुराग चौहान (अध्यक्ष, NMOPS रायपुर), देवेश डोभाल, सतीश कपरूवान, पवन चौधरी, हरीश जोशी, अनिल गुसाईं सहित विभिन्न जनपदों से आए शिक्षक पदाधिकारी एवं शिक्षक मौजूद रहे।

 

शिक्षकों ने कहा कि TET की अनिवार्यता समाप्त करने, NPS को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना लागू करने तथा शिक्षक-कर्मचारियों की अन्य लंबित समस्याओं के समाधान को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। कार्यक्रम में प्रदेशभर से शिक्षकों की सहभागिता ने संगठन की एकजुटता और मांगों के प्रति उनके दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया।

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