TET की अनिवार्यता समाप्त और OPS बहाली की मांग को लेकर शिक्षकों का प्रदर्शन, PM को ज्ञापन सौंपा

 

 

आज जनपद देहरादून के शिक्षकों ने *जिलाध्यक्ष देहरादून श्री धर्मेन्द्र सिंह रावत* के नेतृत्व में मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन कर *माननीय प्रधानमंत्री जी* के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन *मुख्य शिक्षा अधिकारी श्री गोविंद राम जायसवाल* एवं *जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रेम लाल भारती* को सौंपा गया।

 

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने शिक्षक विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई।

 

*प्रमुख मांगें:*

1. *TET से छूट:* वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।

2. *OPS बहाली:* अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए *पुरानी पेंशन योजना (OPS)* को बहाल किया जाए।

3. *स्थानांतरण:* चकराता और कालसी क्षेत्र में 10 वर्ष से अधिक समय से कार्यरत शिक्षकों का शीघ्र स्थानांतरण किया जाए।

 

इस अवसर पर *जिलाध्यक्ष श्री धर्मेन्द्र सिंह रावत* ने कहा कि यह प्रदर्शन शिक्षकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए किया गया है। सरकार को शिक्षकों की जायज मांगों पर शीघ्र ध्यान देना चाहिए।

 

*धरना-प्रदर्शन में प्रमुख रूप से उपस्थित:*

जिला संरक्षक *शशि दिवाकर*, जिला मंत्री *रूपक*, जिला उपाध्यक्ष *शैलेन्द्र नेगी*, NMOPS अध्यक्ष *अनुराग चौहान*, *लक्ष्मण सोलंकी, कुलदीप कुमार, मंजीत सोलंकी, सिद्धार्थ शर्मा, शशांक शर्मा, प्रेम लाल, हृदय राठी, दिलीप सिंह, संतोष गड़ोही, रायपुर अध्यक्ष अरविंद सोलंकी, बिनोद असवाल, प्रवेश ढोंडीयाल, अनिल गुसाई, हरीश जोशी, सुनीता रावत, चकराता अध्यक्ष संगीता चौहान, डोईवाला अध्यक्ष नरेंद्र सागर, सीमा चौहान, संतोष रावत, ज्योति सिंह, ललिता खाली, मीना रतूड़ी, पुष्पलता भास्कर, चंद्रकांता, अर्चना कन्नौजया* सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।