चेन्नै/देहरादून, 15 जुलाई: भारत के ग्रामीण विकास की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाने वाले राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने अपना 44वां स्थापना दिवस भव्य समारोह के साथ मनाया। कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों और सामाजिक नवप्रवर्तकों ने भाग लिया, जो संस्था के बहुआयामी योगदान को रेखांकित करता है।
इस वर्ष का विषय था “समावेशी विकास के लिए ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन”, जिसके तहत एक विचार-सत्र और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में पारंपरिक हस्तशिल्प, कृषि नवोन्मेष और ग्रामीण उत्पादों की झलक सामने आई।
प्रमुख वक्तव्य और उद्घाटन
नाबार्ड के अध्यक्ष शाजी के. वी. ने कहा, “44 वर्षों की हमारी यात्रा ग्रामीण परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। हम वित्तीय समावेशन और नवाचार के माध्यम से लाखों ग्रामीण जीवन को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं।”
डीएफएस के सचिव एम. नागराजू ने नाबार्ड को भारत की ग्रामीण रणनीति का स्तंभ बताते हुए कहा, “डिजिटल युग और जलवायु चुनौतियों के बीच नाबार्ड की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है।”
तमिलनाडु के मुख्य सचिव एन. मुरुगानंदम ने राज्य में आजीविका सशक्तिकरण में नाबार्ड के योगदान की सराहना करते हुए कहा, “स्वंय सहायता समूहों को समर्थन और वित्तीय समावेशन को गति देने में संस्था अग्रणी रही है।”
लॉन्च की गई नई पहलें
- लेह उप-कार्यालय का उद्घाटन – सीमावर्ती क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम
- WhatsApp चैनल की शुरुआत – एफपीओ, बाजार जानकारी और उत्पाद अपडेट सीधे हितधारकों तक
- रेडियो जिंगल अभियान – ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने हेतु
- ग्रॅज्युएटेड रुरल इन्कम जनरेशन प्रोग्राम (GRIP) – अत्यंत गरीब परिवारों को वित्तीय मुख्यधारा में लाने का प्रयास
- रूरल टेक्नोलॉजी को-लैब पोर्टल – ग्रामीण तकनीकों की सह-निर्मिति के लिए खुला मंच
- ‘निवारण’ शिकायत प्रणाली – ग्रामीण सहकारी बैंकों हेतु 24×7 डिजिटल सुविधा
प्रकाशन और वृत्तचित्र
समारोह में ‘ग्रीन रूट्स’ नामक वृत्तचित्र प्रस्तुत किया गया, जो पर्यावरणीय प्रबंधन और संधारणीय कृषि में नाबार्ड के योगदान को दर्शाता है। साथ ही तीन प्रकाशनों का विमोचन हुआ:
- RIDF@30 – ग्रामीण आधारभूत संरचना की तीन दशकों की यात्रा
- ग्रामीण भारत महोत्सव – भारत मंडपम में आयोजित सांस्कृतिक झलकियों का संकलन
- Beyond Numbers 2025 – ऋण, जलवायु और डिजिटल क्षेत्रों में संस्था की भूमिका
इस आयोजन ने नाबार्ड को एक बार फिर भारत के ग्रामीण भविष्य को संवारने वाली अग्रणी संस्था के रूप में स्थापित किया है, जहां समावेशन, नवाचार और प्रभाव की मूल भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।