देहरादून: दून अस्पताल में कमीशनखोरी, निर्माण में खामी और मरीजों को भटकाने पर चिकित्सा शिक्षा निदेशक का बड़ा एक्शन, 72 घंटे में मांगी जांच रिपोर्ट

 

 

*देहरादून।* उत्तराखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में व्याप्त अनियमितताओं, कमीशनखोरी के गंभीर आरोपों, नए निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल और OPD में गरीब मरीजों को भटकाने की लगातार मिल रही शिकायतों पर चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने बड़ा संज्ञान लिया है। चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने आज स्वयं दून अस्पताल का औचक निरीक्षण कर अस्पताल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई और नोटिस जारी कर 72 घंटे में जांच रिपोर्ट तलब की है।

 

पिछले दो दिनों से दून अस्पताल की OPD और अल्ट्रासाउंड विभाग में स्टाफ की मनमानी और गरीब मरीजों को घंटों भटकाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। सरकारी पर्चियों और बिलिंग रसीदों में भी इसकी पुष्टि हुई थी कि Poor श्रेणी के मरीजों को भी समय पर अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधा नहीं मिल रही है।

 

*तीन बड़े आरोप जिन पर हुई कार्रवाई -*

 

*1. कमीशनखोरी का गोरखधंधा:* सबसे गंभीर आरोप है कि अस्पताल के कुछ स्टाफ की मिलीभगत से मरीजों को अस्पताल के अंदर मुफ्त में होने वाली जांचें भी बाहर की निजी लैब से कराने के लिए मजबूर किया जाता है। जन औषधि केंद्र और मुफ्त दवा काउंटर होने के बावजूद बाहर के मेडिकल स्टोर से महंगी दवाइयां लिखी जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार हर पर्ची पर 20 से 30 प्रतिशत तक कमीशन तय है। 100 रुपये की OPD पर्ची लेकर आने वाले गरीब मरीज को बाहर 2000-3000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

 

*2. निर्माण कार्यों में खामी:* अस्पताल परिसर में पिछले एक साल में बने नए वार्ड और OPD ब्लॉक में दीवारों में सीलन, फर्श में दरारें, घटिया टाइल्स और लीकेज की शिकायतें आम हैं। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और प्रशासन ने अनदेखी की। निदेशक ने PWD और मेडिकल कॉलेज की संयुक्त तकनीकी टीम से जांच के निर्देश दिए हैं।

 

*3. मरीजों को भटकाने का सिस्टम:* मौजूद 01 अक्टूबर 2026 की OPD पर्चियों में साफ है कि एक गरीब महिला मरीज को डॉक्टर ने सुबह 11:24 बजे Routine Ultrasound लिखा, 11:51 बजे Poor कैटेगरी में बिल भी बन गया, लेकिन अल्ट्रासाउंड विभाग में उसे घंटों भटकाया गया। रोजाना टिहरी, उत्तरकाशी, चकराता जैसे दूर-दराज से आने वाले सैकड़ों मरीजों के साथ यही होता है। स्टाफ मशीन खराब या डॉक्टर नहीं है कहकर टाल देता है, जबकि अंदर जान-पहचान वालों के अल्ट्रासाउंड होते रहते हैं।

 

*निदेशक का औचक निरीक्षण -*

 

आज दोपहर करीब 1 बजे निदेशक बिना पूर्व सूचना के टीम के साथ OPD ब्लॉक पहुंचे। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर लंबी लाइन देख खुद मरीजों से बात की। एक बुजुर्ग ने बताया कि वह सुबह 8 बजे से लाइन में है। अंदर जाकर रजिस्टर और हाजिरी चेक की तो कुछ स्टाफ नदारद मिला।

 

इसके बाद प्रमुख अधीक्षक और सभी विभागाध्यक्षों की आपात बैठक बुलाई और तीन निर्देश दिए –

 

*पहला -* अल्ट्रासाउंड और OPD में तैनात संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस, 24 घंटे में लिखित स्पष्टीकरण।

*दूसरा -* कमीशनखोरी और निर्माण में खामी की जांच के लिए दो अलग-अलग समितियां, 72 घंटे में विस्तृत रिपोर्ट निदेशालय को।

*तीसरा -* सभी विभागों में बायोमेट्रिक हाजिरी और CCTV कैमरों को तुरंत ठीक कर मॉनिटरिंग सीधे निदेशालय स्तर से करने के निर्देश।

 

निदेशक की इस कार्रवाई के बाद मरीजों और तीमारदारों में राहत है, वहीं अस्पताल के कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। अब देखना होगा कि फटकार और नोटिस के बाद व्यवस्था में वास्तविक सुधार होता है या यह भी औपचारिक कार्रवाई बनकर रह जाएगी।

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