महाराज ने रामपुर तिराहा कांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि

 

देहरादून। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने 2 अक्टूबर 1994 की काली रात में मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले उत्तराखंड के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हमारे शहीद आज भी उत्तराखंड के हिमालय, गंगा-यमुना और हर गांव-घर में जीवित हैं। नवंबर 2000 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने हमें उत्तराखंड दिया, तो वह इन शहीदों के सपने का ही साकार रूप था जिसे आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार संवारने का काम कर रहे हैं।

 

कैबिनेट मंत्री श्री महाराज ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि 2 अक्टूबर 1994 को जब गांधी जयंती के दिन हमारे निहत्थे उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड से दिल्ली कूच के लिए निकले थे, तो मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर उन्हें रोक कर जिस बर्बरता के साथ उन पर गोलियां चलाई गईं, वह लोकतंत्र के इतिहास का सबसे क्रूर और गहरा जख्म है।

 

उन्होंने कहा कि वह हमारे भाई केवल अपने लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए, इस पर्वतीय राज्य के सम्मान, स्वाभिमान और अस्मिता के लिए लड़ रहे थे।

उनके ही बलिदान से हमें यह उत्तराखंड मिला। यह राज्य हमें ऐसे ही नहीं मिला, यह 42 से अधिक शहादतों और लाखों लोगों के संघर्ष, लाठियों और गोलियों के बाद मिला है। आज हमारी सरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शहीदों के परिवारों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में सरकारी नौकरियों में उत्तराखंड राज्य निर्माण के चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों के बच्चों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। उन्हें मिलने वाली पेंशन को भी राज्य सरकार ने बढ़ा दिया है।

 

श्री महाराज ने कहा कि हम नई पीढ़ी को रामपुर तिराहा कांड के इतिहास से अवगत कराने के लिए स्कूलों के पाठ्यक्रम में अपने वीर शहिदों की वीर गाथाओं को स्थान दे रहे हैं, ताकि कोई भी बच्चा यह न भूले कि यह राज्य कितने बलिदान से बना है। समृद्ध, स्वावलंबी, पलायन-मुक्त पर्यटन और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विश्व में पहचान बनाने की जिस उत्तराखंड की कल्पना हमारे शहीदों ने की थी हमारी सरकार उसे ही साकार करने का प्रयास कर रही है।

 

 

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