उत्तराखंड में अब विधानसभा चुनाव फरवरी में ही होंगे!

 

देहरादून। हरिद्वार कुंभ के चलते उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव समय से पहले दिसंबर 2026 में कराए जाने की अटकलों पर अब विराम लग गया है। भारत सरकार की ओर से जारी जनगणना की अधिसूचना के बाद चुनाव तय समय पर फरवरी 2027 में ही होने की संभावना बढ़ गई है। इसे लेकर पिछले कुछ समय से प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज थी और चुनावी मैदान में उतरने के इच्छुक दावेदार विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय हो गए थे।

 

उत्तराखंड में 4 दिसंबर 2026 से 5 जनवरी 2027 तक जनगणना प्रस्तावित है। इस दौरान बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई जाएगी। विधानसभा चुनाव के लिए भी प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़े स्तर पर आवश्यकता होती है। ऐसे में जनगणना के बीच चुनाव कराना प्रशासन के लिए मुश्किल होगा।

 

वहीं, 5 जनवरी के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम एक और बड़ी चुनौती बन सकता है। ऊंचाई वाले इलाकों में जनवरी-फरवरी के दौरान बर्फबारी के कारण कई सड़कें और संपर्क मार्ग प्रभावित होते हैं। ऐसे में चुनावी मशीनरी, मतदान दल और सुरक्षा बलों को दूरस्थ बूथों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि फरवरी में भी मौसम चुनौतीपूर्ण रहता है, लेकिन निर्धारित चुनावी कार्यक्रम के अनुरूप तैयारियां पहले से की जा सकती हैं।

 

दावेदारों ने बढ़ाई थी सक्रियता

 

दिसंबर में चुनाव की संभावना को देखते हुए संभावित प्रत्याशियों ने अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क बढ़ा दिया था। राजनीतिक दलों के नेता भी संगठनात्मक स्तर पर तैयारियों में जुटे थे। अब फरवरी में चुनाव होने की संभावना से दावेदारों को रणनीति बनाने के लिए कुछ और समय मिल गया है।

 

2022 में भाजपा ने जीती थीं 47 सीटें

 

उत्तराखंड में पिछला विधानसभा चुनाव 14 फरवरी 2022 को हुआ था और परिणाम 10 मार्च 2022 को घोषित किए गए थे। 70 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 47 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। कांग्रेस को 19, बसपा को दो और निर्दलीय उम्मीद है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Nikhil Chetna एक ऐसी साइट लगती है जहाँ रोज़मर्रा के फैसलों को ज़्यादा जागरूक, शांत और सोच-समझकर लेने की बात सामने आती है। यहाँ ध्यान इस बात पर है कि किसी भी चमकदार वादे या जल्दी मिलने वाले फायदे के पीछे भागने से पहले स्थिति को ठीक से समझा जाए। यही तरीका सिर्फ आत्मविकास या निजी चुनावों में नहीं, बल्कि ऑनलाइन सेवाओं, डिजिटल मनोरंजन और पैसे से जुड़े फैसलों में भी काम आता है। स्विट्ज़रलैंड में ऑनलाइन कैसीनो की बात आए, तो सावधानी और भी ज़रूरी हो जाती है। सुंदर वेबसाइट, बड़ा बोनस या आसान रजिस्ट्रेशन अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं होते। पहले यह समझना बेहतर है कि ऑपरेटर के पास वैध लाइसेंस है या नहीं, ESBK की भूमिका क्या है, भुगतान, सीमाओं और खिलाड़ी सुरक्षा से जुड़े नियम कैसे काम करते हैं। ऐसे कानूनी ढांचे, लाइसेंस, ESBK की निगरानी और आम गलतियों को समझने के लिए उपयोगी जानकारी यहाँ मिल सकती है: l legale Online-Casinos in der Schweiz findenइसके बाद कानूनी प्लेटफॉर्म और जोखिम भरे ऑफशोर विकल्पों में फर्क करना काफी आसान हो जाता है। आखिर में, Nikhil Chetna जैसी सोच डिजिटल मनोरंजन में भी संतुलित निर्णय लेने में मदद करती है। नियम, लाइसेंस और संभावित जोखिम जितने साफ होंगे, उतनी ही कम गलतफहमियाँ और गलत चुनाव होंगे।